Tuesday, September 11, 2007

यह घर है

यह घर है
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यह घर है
इसमें एक बार कोई चीज़
खोयी तो मिली नहीं

मगर कुछ चीज़े कभी खोयी नहीं।
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चाक़ू
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चाकू खुद ह्त्या नहीं करता
और मदद तो वह
सब्जी काटने में भी करता है.

2 comments:

उन्मुक्त said...

हिन्दी चिट्ठाकरी के घर में प्रवेश करने पर स्वागत है।

Vishnu Nagar said...

dhanyawad.