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Wednesday, September 12, 2007

ईश्वर की कहानियाँ -2

ईश्वर ने जब सुना कि एक आदमी अपने को ईश्वर बताकर लोगों को लूट रह है तो उन्होंने मुँह अँधेरे सारे शहर में पोस्टर लगवा दिए, 'नकली ईश्वर से सावधान .धोखा मत
खाइए।'
अगले दिन जवाबी पोस्टर लगे थे -'असली ईश्वर से सावधान । उसी के कारण आज दुनिया की यह हालत हो चुकी है।'
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लहलहाती फसल को देखकर ईश्वर किसान से बोले,'बहुत पुण्यवान हो।'
'पुण्यवान और मैं ? पुण्यवान तो आपका वह सेठ है जिसका मैं कर्ज़दार हूँ और जिसके घर यह सारी फसल चली जायेगी.'

Tuesday, September 11, 2007

ईश्वर की कहानियाँ

मनुष्य के चोले में पृथ्वी पर आने से पहले ईश्वर को उन सबसे प्यार था , जो उनसे प्यार करते थे।

लेकिन पृथ्वी पर आने के बाद उन्होंने पाया कि वे ऐसे कई लोगों से नफ़रत करते हैं जो उनसे प्यार करते हैं और ऐसे कई लोगों से प्यार करते हैं जो उनसे नफ़रत करते हैं।



ईश्वर को पृथ्वी पर आये बहुत अरसा बीत चुका था .वह चलते-चलते प्रवचन सुनने रुक गए।

प्रवचनकर्ता ने कहा -ईश्वर अव्याखेय है ...

'हाँ बिल्कुल आदमी की तरह' ईश्वर बोल पड़े .
प्रवचनकर्ता ने उन्हें 'मूर्ख' कहा.ईश्वर ने बदले में उसे मूर्ख कहने कि बजाय वहां से चुपचाप चले जाना ठीक समझा.