ईश्वर कल्पना करते थे कि धरती पर बच्चों के हाथों में बांसुरियां होंगी लेकिन जब उन्होंने देखा कि बच्चों के हाथों में पिस्तोलें हैं और ये उन्हें अमिताभ बच्चन ने थमाई हैं तो उनके विचार बदले कि इतनी सदियाँ बीत चुकीं हैं इस बीच आदमी ने स्वाभाविक है कुछ प्रगति भी की है।
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ईश्वर ईश्वर होकर भी उस दिन भूखे थे ।
दोपहर का वक्त था । दो आदमी बातें कर रहे थे ,'आदमी को बस आदमी का प्यार
चाहिए ।'
'और अगर दोपहर का एक बज चुका हो तो खाना भी चाहिए,'ईश्वर ने कहा लेकिन लोगों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
(कृपया १३ सितंबर और इससे पहले की पोस्ट भी देखें.)
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Monday, September 17, 2007
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