बुश एक दिन राष्ट्रपति नहीं रहा।
उसने अपने सहायक से पूछा -भइये ये बता अब ये दुनिया कैसे चलेगी?
सहायक अभी भी उसका वफादार बना हुआ था।उसने जवाब दिया - भगवान भरोसे चलेगी और कैसे चलेगी?
बुश ने जवाब दिया-यही तो मुश्किल है। भगवान तो खुद मेरे भरोसे चल रहा है।
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जैसे गाय का दूध बछ्डों को कम आदमी को ज्यादा मिलता है , उसी तरह बुश के वचनों से अमेरिकी कम दुनियाभर के लोग ज़्यादा लाभान्वित हो रहे थे।
बुश के सहायक ने कहा कि सर दुनिया आपके वचनों की मुफ्तखोरी कर रही है।आपको अपने अमूल्य वचनों की रायल्टी मिलनी चाहिए ।
यह सुनकर बुश अचानक दार्शनिक बन गया। उसने कहा- छोडो यार हमने अभी आक्सीजन पर भी तो टैक्स नहीं लगाया। जब ऑक्सीजन पर टेक्स लगायेंगे तो मेरे वचनों पर भी रायल्टी लेने लगेंगे।
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बुश एक दिन खूब खुश था।
सब सहायक एकदूसरे से पूछ रहे थे कि साहब आज इतने ज़्यादा खुश क्यों हैं लेकिन कोई खुद बुश के पास जाकर पूछ नहीं रहा था। वजह यह नहीं थी कि लोग बुश से डरते थे , कारण यह था कि इसके जवाब में बुश यह कह सकता था कि मैं यह सोच-सोचकर खुश हूँ कि मैं यह तो अच्छा हुआ कि मैं इराक में फंस गया वरना क्या पता मैं भी किसी लौंडिया से फंसकर बदनाम हो जाता।
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Monday, October 22, 2007
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