Saturday, June 21, 2008

एवरेस्ट

उन्होंने कहा
इनका क्या कहना
इनको तो जी हम अपना
एवरेस्ट मानते हैं

इतना कहकर
मैं संभलता
इससे पहले
उन्होंने मुझमें
अपने झंडे गाढ दिए
और चूंकि उनके पास
कैमरे थे
तो मैंने अपनी छटा
दिखाने में भी विलंब नहीं किया ।
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3 comments:

Rajesh Roshan said...

छटा दिखाने वाला बड़ा है कि झंडा गाड़ने वाला... गहरी पंक्तिया...

नई पीढ़ी said...

हा...हा...हा...हा...!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

ब्‍लॉगजगत में आपको देखकर प्रसन्‍नता हुई।

कृपया फालोअर विजेट लगालें, जिससे आपके ब्‍लॉग की सभी गतिविधियों से अवगत होने में आसानी हो।

मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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ब्‍लॉगसमीक्षा की 27वीं कड़ी!
आखिर इस दर्द की दवा क्‍या है ?