Friday, June 6, 2008

जहाँ हरा होगा

जहाँ हरा होगा

वहां पीला भी होगा

गुलाबी भी होगा

वहां गंध भी होगी

उसे दूर-दूर ले जाती हवा भी होगी

और आदमी भी वहां से दूर नहीं होगा।

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5 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

:)

राजीव रंजन प्रसाद said...

अच्छा है..

***राजीव रंजन प्रसाद

sanjay patel said...

और उस आदमी को रंगो का अहसास दिलाने के लिये आप जैसा संवेदनशील कवि भी होगा.

मुंहफट said...

नागर जी आपको रोज-रोज पढ़ने का मन करता है।

Arun Aditya said...

हरा है, तो पता नहीं कितने रंग हैं, गंध है। चंद शब्दों में बहुत गहरी बात, हमेशा की तरह।