Tuesday, April 29, 2008

पत्थरों का भी दिल होता है

कौन कहता है
पत्थरों का दिल नहीं होता ?
होता है
हमने तो ऐसे दिल भी देखे हैं
जिनकी हार्ट सर्जरी तक हो चुकी है।

धुप और छाँव
हमने सोचा कि हमारा घर धुप में होना चाहिए
फ़िर सोचा छाँव में होना चाहिए

फ़िर मुस्कराकर हमने अपने आप से कहा
पहले घर तो हो
धुप होगी तो छाँव भी चली आयेगी।

..................................................

6 comments:

neeraj badhwar said...

khoobsoorat!

Udan Tashtari said...

बढ़िया.

sanjay patel said...

आपके आशियाने की तलाश जल्द पूरी हो

Dr. Amar Jyoti said...

'पहले घर तो हो…'
बहुत ख़ूब।

vasudha said...

badhai. blog ki duniya me aapka aur aapki kavitaon ka swagat ek latecomer ki or se.

चंदन कुमार मिश्र said...

होता है लेकिन वह भी पत्थत का ही तो होता होगा न?